Loading...

Welcome To

सरस्वती शिशु मन्दिर

सरस्वती शिशु मन्दिर योजना का शुभारम्भ सन् 1952 में पक्की बाग, गोरखपुर में हुआ। जिसे समय-समय पर अनेक श्रेष्ठजनों का स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।समाज व महापुरुषों के सम्बल व स्वीकार्यता के कारण शिशु मन्दिर योजना सम्पूर्ण देश में लगभग 3500 विद्यालयों के माध्यम से भैया बहिनों में राष्ट्र भक्ति का भाव निर्मित करते हुये उनके सर्वांगीण विकास का कार्य सफलता पूर्वक कर रही है।
सर्व समाज में शिक्षा के साथ संस्कार देनेकी अद्भुतव्यवस्था के कारण प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहे सरस्वती शिशु मन्दिर गोरखपुर की तरह का विद्यालय अपने प्रयागराज में भी होना चाहिए ऐसा श्रेष्ठ चिन्तन स्थानीय संघ व शिक्षाप्रेमी कार्य कर्ताओं की बनी। फलस्वरुप सन् 1966 में सरस्वती शिशु मन्दिर सिविल लाइन्स प्रयागराज का शुभारम्भ हुआ। शीघ्र ही अच्छी शिक्षा व संस्कार देने के कारण विद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ने लगी। समय के साथ- साथ एक दीप से जले दूसरे, जलते दीप अनेक की तरह आगे की शिक्षा तथा संस्कार के लिए सरस्वती शिशु मन्दिर सिविल लाइन्स प्रयागराज का शुभारम्भ हुआ, जो जिले में ही नहीं बल्कि प्रान्त स्तर तक नये-नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
इस प्रकार हम शिशुवाटिका (Playgroup) से पंचम तक की उत्तम शिक्षा के साथ संस्कार देने के लिए तत्पर हैं।

Read More..

Message Board

Leadership Messages That Guide and Inspire

Words of wisdom from our Manager, Principal, and Head.

प्रबंधक संदेश

यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सरस्वती शिशु मन्दिर सिविल लाइन्स, प्रयागराज जो भारती शिक्षा समिति काशी प्रान्त द्वारा संचालित है। विद्यालय अपनी विवरण पुस्तिका प्रकाशित कर रहा है। विद्यालय की विवरण पुस्तिका अभिभावकों को विद्यालय में होने वाली सम्पूर्ण गतिविधियों की जानकारी प्रदान करतीहै। में विद्यालयके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

Read More

प्राचार्य का संदेश

विद्यालय एक देवालय के समान होता है, जहाँ पर भैया बहिन अपने परिवार के सुख वैभव को त्याग कर ज्ञान अर्जित करने के लिए आते हैं। शिक्षक उसके ज्ञान पर पड़ी राख को अपने वात्सल्य रूपी शिक्षा से हटाकर ज्ञान के भण्डार सेउसे भर देता है। सरस्वती शिशु मन्दिर सिविल लाइन्स प्रयागराज में अध्ययनरत भैया बहिन शारीरिक प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूर्ण विकसित हों तथा उनके अन्दर देशभक्ति, स्वाभिमान, आत्म निर्भरता जैसे गुणों का समावेश हो यही मेरी इच्छा है। पूर्ण विश्वास है कि आप सबके स्नेहाशीष से विद्यालय प्राप्त चुनौतियों का सामना करते हुए नवीन ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।

Read More

शिशु वाटिका प्रमुख

फल अच्छा चाहिए तो बीज की चिन्ता करें, भवन सुदृढ़ चाहिए तो नीव की चिन्ता करें, समाज व राष्ट्र समर्थ चाहिए तो शिक्षा की चिन्ता करें और शिक्षा उत्तम चाहिएतो शिशु शिक्षा की चिन्ता करें। विद्याभारती के इसी प्रयासका प्रत्यक्ष रूपहै - शिशु वाटिका । शिशुवाटिका आनन्द का धाम है, आनन्ददायक क्रियाकलाप, संस्कारक्षम वातावरण, प्रत्यक्ष अनुभव,स्नेहपूर्ण पारिवारिक व्यवहार और स्वतन्त्र महज अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण स्थान है तथा रुचिपूर्णशिक्षण पद्धति द्वारा शिशुओं के शरीर प्राण, मन, बुद्धि व आत्माके समग्र विकास का अनुपम केन्द्र है।

Read More

सरस्वती शिशु मन्दिर

शिशुओं के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से पंचमुखी शिक्षा की व्यवस्था

1. शारीरिक शिक्षा 2. मानसिक शिक्षा 3. व्यवसायिक शिक्षा 4. नैतिक शिक्षा 5. आध्यात्मिक शिक्षा
अपनी मातृभूमि, संस्कृति, धर्म, परम्परा एवं महापुरुषों से सम्बन्धित ज्ञान हेतु अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन।
शिशुओं के समुचित विकास की जानकारी आदान-प्रदान हेतु अभिभावक सम्पर्क, अभिभावक गोष्ठी तथा मातृ सम्मेलन
अखिल भारतीय स्तर तक खेल-कूद, अंग्रेजी, वैदिक गणित, विज्ञान प्रश्न मंच तथा कला, गीत, विज्ञान प्रदर्शनी, नृत्य आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन।
वन्दना, भोजन मंत्र, प्रातः स्मरण एकात्मता स्त्रोत, राष्ट्र वन्दना, महापुरुषों की जयन्तियों द्वारा उत्कृष्ट संस्कारों पर बल।
शिशुओं के सर्वांगीण विकास हेतु सतत मूल्यांकन पद्धति का प्रयोग।
शुद्ध पेय जल (R.O.) एवं प्रसाधन हेतु स्वच्छ शौचालय एवं लघु शंकालय की उत्तम व्यवस्था।
प्रयोग आधारित शिक्षण हेतु कम्प्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला एवं स्मार्ट क्लास की व्यवस्था।
अंग्रेजी शिक्षण के साथ स्पोकन इंग्लिश शिक्षण की विशेष व्यवस्था ।
विद्यालय के कार्यक्रम व अवकाश एवं अन्य सूचनाओं के लिए S.M.S के माध्यम से आप तक सूचना प्रेषित करने की व्यवस्था।
एक ही परिसर में शिशु वाटिका (PLAYGROUP) से CLASS 12TH तक शिक्षण की व्यवस्था।

School Topper

View All Toppers

School Glimpses

Our Precious Moments

  ADMISSION ENQUIRY